पार्टी मे
नयी ज़िम्मेदारी लेने के बाद जब नरेन्द्र मोदी ने बिहार के 1500 कार्यकर्ताओं को
टैलिकौन्फ्रेंसिंग के ज़रिये मीटिंग की, तो
तय हो गया कि बीजेपी मे कार्यकर्ताओं को जल्दी ही हाईटेक होना पड़ेगा।
कि देश के
किसी नेता ने चुनावी रैली मे 3डी टैक्नौलिजी का इस्तेमाल किया हो। नरेन्द्र
मोदी के चुनावी विजयी रथ मे टैक्नौलिजी कितना अहम है, इसका अहसास लोगों को भले अब
हो रहा हो।
लेकिन इसकी नींव 2007
के गुजरात चुनावों मे ही रख दी गयी थी। गुजरात बीजेपी एसएमएस और ईमेल के ज़रिये
पत्रकारों और पार्टी वर्कर्स को पल पल
की जानकारी दी जा रही थी। हर रोज़
सवेरे 6 बजे ही मुख्यमंत्री के पास एक सूची पहुंच जाती है जिसमे पिछले दिन
उनसे जुड़ी हर खबर की जानकारी होती है। इसके अलावा
उनका मीडिया तंत्र इतना मज़बूत है कि पूरे देश की जानकारी, चुपचाप उनके
कम्प्यूटर मे पहुंच कर उन तक पहुंचती रहती है। उनका एक
गुप्त लेकिन पर्सनल ईमेल आईडी भी है, जिस पर वह आईपैड के ज़रिये अपना काम औन द
मूव करते रहते हैं।
अब बात करते हैं ट्विटर की। जब 2009
मे मोदी ने ट्विटर की दुनिया मे कदम रखा तो कांग्रेस के नेता और राज्य मानव संसाधन
मंत्री शशी थरूर, ट्विटर पर
भारत के सबसे लोकप्रिय व्यक्ति थे। लेकिन चार सालों मे नज़ारा पूरी तरह बदल चुका
है। कुछ दिन पहले ही मोदी के
ट्विटर पर फौलोअर्स की संख्या थरूर से आगे निकल गयी।
अगर हम जुलाई 2013 की शुरूआत के आंकड़े देखें, तो मोदी के 18 लाख 20 हज़ार 636 फौलोअर्स थे।
जबकि थरूर, 18 लाख 20 हज़ार 622 फौलोअर्स के साथ दूसरे नंबर पर थे। तीसरे
नंबर पर बीजेपी नेता सुषमा स्वराज 5 लाख 21 हज़ार के साथ थीं। वहीं 3
लाख 5 हज़ार फौलोअर्स पर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमार अब्दुल्ला थे। कांग्रेस के नये मीडिया प्रभारी अजय माकन के साथ 2 लाख 67 हज़ार फौलोअर्स थे।
नरेन्द्र
मोदी और शशी थरूर के बीच ज़्यादा फर्क भले ना दिखता हो, लेकिन जिस तेज़ी से मोदी
के फौलोअर्स की संख्या
बढ़ रही है। उसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि 20 जून को जहां शशी थरूर
के 18 लाख 10 हज़ार 673 फौलोअर थे। वहीं मोदी 17 लाख 35 हज़ार 870 के नंबर पर थे। 28 जून को
थरूर 18 लाख 14 हज़ार 756 पर थे, जबकि मोदी 17 लाख 96 हज़ार 254 पर जा पहुंचे
थे। 3 जून
को मोदी के फौलोअर्स थरूर (18 लाख 20 हज़ार 622) के फौलोअर्स से 14 ज़्यादा थे।
टैक्नौलिजी
और सोशल मीडिया मे अब मोदी ने भले अपनी जगह बना ली हो। लेकिन अभी भी कुछ कमियां
है। कुछ समय पहले तक रहे कट्टर मोदी समर्थक और सोशल मीडिया एक्सपर्ट
पारथेष पटेल मानते हैं कि
उनकी लोकप्रियता के पीछे काफी कुछ छिपा है। पिछले दो साल से गुजरात बीजेपी के आईटी विभाग से जुड़े रहे पटेल ने मोदी के लिये कई फेसबुक पेज भी बनाये थे जो अभी भी चल रहे हैं। उनका कहना है कि आधे से ज़्यादा फौलोअर फर्ज़ी हैं और फौसोअर्स की संख्या बढ़ाने के लिये कई आईटी कम्पनियों का सहारा लिया गया है।
कारण चाहे जो हो, लेकिन वह ट्विटर हो या फेसबुक या फिर खुद की ही वैबसाइट। न्यू और सोशल मीडिया मे मोदी ने बाकी नेताओं
को पीछे छोड़
दिया है। शायद यही वजह है कि कांग्रेस पार्टी ने हाल ही मे अपना नया सोशल मीडिया
सेल बनाया है। जिसकी ज़िम्मेदारी हरयाणा मुख्यमंत्री के युवा सांसद दीपिन्दर हुड्डा को दिया गया है। वह भी इसी उम्मीद
में कि कांग्रेस, मोदी के कुछ गुर सीख कर उन्ही पर इस्तेमाल कर पायें। लेकिन शायद तब तक
मोदी किसी नयी
तरकीब को
अंजाम दे चुके होंगे।
No comments:
Post a Comment