Wednesday, August 7, 2013

मोदीः हिन्दुत्व बनाम विकास


गुजरात के मुख्यमंत्री ने अपने प्रदेश मे भले ही विकास के नये आयाम भले बना लिये हों, लेकिन उनकी जो हिन्दुत्व के पोस्टर बौय की छवि है वह अब भी बरकरार है। नरेन्द्र मोदी अब अपनी छवि को किस दिशा मे ले जाना चाहते हैं, यह देखना दिलचस्प रहेगा।

भारतीय राजनीति मे शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो नरेन्द्र मोदी से ज़्यादा चर्चित होगा। इसलिये जब 11 जुलाई को मोदी ने रमज़ान की शुभकामनायें दीं, तो शिवसेना के माउथपीस सामना अखबार मे उन पर इस भयंकर कटाक्ष किया गया। पर मोदी तो मोदी है। अगले ही दिन जुम्मे पर उन्होने रौयटर्स को इंटरव्यू देकर अपने विवादास्पद बयान से अपने कोर हिन्दुत्व छवि को दोबारा फोकस मे ला दिया। आलम यह रहा कि तब से अब तक पूरी बीजेपी उनके बयान की सफाई देती फिर रही है।

2002 गोधरा काण्ड और उसके बाद हुए दंगों ने नरेन्द्र मोदी पूरे संघ परिवार के आंखों को तारा बना दिया। यह सिलसिला 2007 विधानसभा चुनावों तक चला। लेकिन उसके बाद मोदी ने अपनी विकास पुरूष की छवि को सटीक तरीके से उभारा। उनका नाम राष्ट्रीय नेताओं मे शुमार हो गया। लेकिन सवाल यह है कि आखिर मोदी की लाइन है क्या।

नरेन्द्र मोदी जहां एक ओर 2002 के दाग को मिटाना भी चाहते हैं...लेकिन अगर वह केवल विकास के नाम पर चुनाव लड़ेंगे...तो उनका कोर हिन्दुत्व वोट उनसे नाराज़ हो सकता है...इसीलिये यह माना जा रहा है...कि वह दोनों मुद्दों को साथ साथ लेकर 2014 चुनावों का शंखनाद करेंगे।

Tuesday, August 6, 2013

क्या मोदी वाकई मे इतने हाई-टेक हैं।


पार्टी मे नयी ज़िम्मेदारी लेने के बाद जब नरेन्द्र मोदी ने बिहार के 1500 कार्यकर्ताओं को टैलिकौन्फ्रेंसिंग के ज़रिये मीटिंग की, तो तय हो गया कि बीजेपी मे कार्यकर्ताओं को जल्दी ही हाईटेक होना पड़ेगा।

इस नयी छवि की अलग मिसाल 2012 विधानसभा चुनावों मे देखने को मिली थी। जब अहमदाबाद के नवरंगपुरा इलाके मे 3डी टैक्नौलोजी का इस्तेमाल चुनावी सभा मे हुआ। ऐसा पहली बार हुआ
कि देश के किसी नेता ने चुनावी रैली मे 3डी टैक्नौलिजी का इस्तेमाल किया हो। नरेन्द्र मोदी के चुनावी विजयी रथ मे टैक्नौलिजी कितना अहम है, इसका अहसास लोगों को भले अब हो रहा हो। 

लेकिन इसकी नींव 2007 के गुजरात चुनावों मे ही रख दी गयी थी। गुजरात बीजेपी एसएमएस और ईमेल के ज़रिये पत्रकारों और पार्टी वर्कर्स को पल पल की जानकारी दी जा रही थी। हर रोज़ सवेरे 6 बजे ही मुख्यमंत्री के पास एक सूची पहुंच जाती है जिसमे पिछले दिन उनसे जुड़ी हर खबर की जानकारी होती है। इसके अलावा उनका मीडिया तंत्र इतना मज़बूत है कि पूरे देश की जानकारी, चुपचाप उनके कम्प्यूटर मे पहुंच कर उन तक पहुंचती रहती है। उनका एक गुप्त लेकिन पर्सनल ईमेल आईडी भी है, जिस पर वह आईपैड के ज़रिये अपना काम औन द मूव करते रहते हैं।
  
अब बात करते हैं ट्विटर की। जब 2009 मे मोदी ने ट्विटर की दुनिया मे कदम रखा तो कांग्रेस के नेता और राज्य मानव संसाधन मंत्री शशी थरूर, ट्विटर पर भारत के सबसे लोकप्रिय व्यक्ति थे। लेकिन चार सालों मे नज़ारा पूरी तरह बदल चुका है। कुछ दिन पहले ही मोदी के ट्विटर पर फौलोअर्स की संख्या थरूर से आगे निकल गयी।

अगर हम जुलाई 2013 की शुरूआत के आंकड़े देखें, तो मोदी के 18 लाख 20 हज़ार 636 फौलोअर्स थे। 
जबकि थरूर, 18 लाख 20 हज़ार 622 फौलोअर्स के साथ दूसरे नंबर पर थे। तीसरे नंबर पर बीजेपी नेता सुषमा स्वराज 5 लाख 21 हज़ार के साथ थीं। वहीं 3 लाख 5 हज़ार फौलोअर्स पर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमार अब्दुल्ला थे। कांग्रेस के नये मीडिया प्रभारी अजय माकन के साथ 2 लाख 67 हज़ार फौलोअर्स थे।
  
नरेन्द्र मोदी और शशी थरूर के बीच ज़्यादा फर्क भले ना दिखता हो, लेकिन जिस तेज़ी से मोदी के फौलोअर्स की संख्या बढ़ रही है। उसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि 20 जून को जहां शशी थरूर के 18 लाख 10 हज़ार 673 फौलोअर थे। वहीं मोदी 17 लाख 35 हज़ार 870 के नंबर पर थे। 28 जून को थरूर 18 लाख 14 हज़ार 756 पर थे, जबकि मोदी 17 लाख 96 हज़ार 254 पर जा पहुंचे थे। 3 जून को मोदी के फौलोअर्स थरूर (18 लाख 20 हज़ार 622) के फौलोअर्स से 14 ज़्यादा थे।

टैक्नौलिजी और सोशल मीडिया मे अब मोदी ने भले अपनी जगह बना ली हो। लेकिन अभी भी कुछ कमियां है। कुछ समय पहले तक रहे कट्टर मोदी समर्थक और सोशल मीडिया एक्सपर्ट पारथेष पटेल मानते हैं कि उनकी लोकप्रियता के पीछे काफी कुछ छिपा है। पिछले दो साल से गुजरात बीजेपी के आईटी विभाग से जुड़े रहे पटेल ने मोदी के लिये कई फेसबुक पेज भी बनाये थे जो अभी भी चल रहे हैं। उनका कहना है कि आधे से ज़्यादा फौलोअर फर्ज़ी हैं और फौसोअर्स की संख्या बढ़ाने के लिये कई आईटी कम्पनियों का सहारा लिया गया है।

कारण चाहे जो हो, लेकिन वह ट्विटर हो या फेसबुक या फिर खुद की ही वैबसाइट। न्यू और सोशल मीडिया मे मोदी ने बाकी नेताओं को पीछे छोड़ दिया है। शायद यही वजह है कि कांग्रेस पार्टी ने हाल ही मे अपना नया सोशल मीडिया सेल बनाया है। जिसकी ज़िम्मेदारी हरयाणा मुख्यमंत्री के युवा सांसद दीपिन्दर हुड्डा को दिया गया है। वह भी इसी उम्मीद में कि कांग्रेस, मोदी के कुछ गुर सीख कर उन्ही पर इस्तेमाल कर पायें। लेकिन शायद तब तक मोदी किसी नयी
तरकीब को अंजाम दे चुके होंगे।


Tuesday, July 30, 2013

टंच माल के बाल की खाल


दिग्विजय सिंह के दिये गये टंच माल के बयान ने दिन भर मीडिया चैनलों के लिये खबर भले ही दे दी हो। लेकिन ऐसे बयानों को हर तरीके से जांच परख करने के बाद ही इतना हाईप देना चाहिये। अगर आप दिग्विजय सिंह का पूरा बयान सुनें तो वह मंडसौर से कांग्रेस की सांसद मीनाक्षी नटराजन के गुणों का बखान कर रहे थे।

वह एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए बोले कि जैसे एक अच्छा जौहरी सोने की परख देखते ही कर लेता है। वैसे ही वह राजनीति के जौहरी हैं और नेताओं की परख अच्छी तरह कर लेते हैं। इसके बाद उन्होने मीनाक्षी के लोगों के बीच काम करने के तरीके की जम कर तारीफ की और कहा कि उनके हिसाब से इस काम मे मीनाक्षी एकदम सौ टंच माल है।

जो लोग मध्य प्रदेश की भाषा से वाकिफ हैं, उन्हे पता है कि टंच एक स्लैंग शब्द है जिसका मतलब टका यानि प्रतिशत होता है। और नेता जब दूर दराज़ इलाकों मे लोगों की बोली बोल कर उनको प्रभावित करना चाहते हैं...तो अकसर उनकी बोली मे बोलते हैं। यही दिग्विजय सिंह ने भी किया, लेकिन उनके बयान का केवल एक अंश दिखा कर ऐसा दर्शाया गया कि उन्होने अपनी पार्टी की युवा महिला सांसद पर भद्दी टिप्पणी की।

अब लोगों को अटपटा लग रहा होगा कि अगर किसी व्यक्ति ने वाकई मे कोई अभद्र टिप्पणी की हो, तो वह मीडिया पर मानहानि का मुकदमा क्यों करने जा रहा है। लेकिन जिन लोगों ने उनका बयान पूरे परिपेक्ष मे सुना है, उनके लिये दिग्विजय सिंह द्वारा ऐसा ठोस कदम उठाना एकदम स्वाभाविक नज़र आयेगा।